नास्तिक बड़े ही सरल होते हैं मगर बड़ा ही कठिन है नास्तिक होना ! जंजीरों में बंधे पड़े रहने की सदियों से आदत हो गयी है , अब तो लगता है जंजीरों के अलावा जिंदगी में कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है !
बड़ा कठिन है जंजीरों को तोड़ना , उनसे मुक्ति पाना ! जिसने भी जंजीरों से खुद को मुक्त कर लिया वो एकदम सरल हो गया , पचड़ों से मुक्त हो गया कि मेरा भगवान बड़ा है , मेरे भगवान के विचार श्रेष्ठतम हैं ! श्रेष्ठतम की लड़ाई से मुक्त वो सर्वश्रेष्ठ बन जाता है , और भरपूर जिंदगी जीता है , वास्तविक जीवन जीता है !
रजनीश से बनते ओशो सिद्धार्थ से बनते बुद्ध जैसे तमाम विचारक इससे मुक्ति पाने का संदेश दे दे कर चले गयें ! लोग कुछ पल को नास्तिक बने फिर उनके जाने के बाद उनको ही भगवान बना कर पूजने लगे , फिर बंध गयें जंजीरों से !
मेरा आग्रह है आप एक बार में नास्तिक मत बनो ! ना नास्तिकता के पक्ष में तर्क कुतर्क करो ! रोज एक दो घंटों के लिये नास्तिक बनो फिर धीरे धीरे समय बढ़ाओ! धीरे धीरे खुद ही जंजीरों से मुक्त हो कर सरल हो जाओगे !
मत जाओ किसी ओशो या बुद्ध की शरण में ! नास्तिक होने कि एक ही शर्त व पहचान है सरल होना !
नास्तिक होने का मतलब आस्तिकों के विपरीत जाना नहीं बल्कि खुद को सरल बनाना मात्र है , जहाँ किसी का विरोध नहीं केवल जीवन है , उमंग है , शांति है , किसी भी मान्यता को ले कर झगड़ा या दंभ नहीं है !
अगर भगवान को मानने की आदत या मजबूरी है तो प्रकृति को भगवान बनाओ जो हमें हवा पानी रौशनी जीवन देती है ! खुद को भगवान बनाओ और मृत हो रही प्रकृति को जीवन प्रदान करो !
बड़ा कठिन है जंजीरों को तोड़ना , उनसे मुक्ति पाना ! जिसने भी जंजीरों से खुद को मुक्त कर लिया वो एकदम सरल हो गया , पचड़ों से मुक्त हो गया कि मेरा भगवान बड़ा है , मेरे भगवान के विचार श्रेष्ठतम हैं ! श्रेष्ठतम की लड़ाई से मुक्त वो सर्वश्रेष्ठ बन जाता है , और भरपूर जिंदगी जीता है , वास्तविक जीवन जीता है !
रजनीश से बनते ओशो सिद्धार्थ से बनते बुद्ध जैसे तमाम विचारक इससे मुक्ति पाने का संदेश दे दे कर चले गयें ! लोग कुछ पल को नास्तिक बने फिर उनके जाने के बाद उनको ही भगवान बना कर पूजने लगे , फिर बंध गयें जंजीरों से !
मेरा आग्रह है आप एक बार में नास्तिक मत बनो ! ना नास्तिकता के पक्ष में तर्क कुतर्क करो ! रोज एक दो घंटों के लिये नास्तिक बनो फिर धीरे धीरे समय बढ़ाओ! धीरे धीरे खुद ही जंजीरों से मुक्त हो कर सरल हो जाओगे !
मत जाओ किसी ओशो या बुद्ध की शरण में ! नास्तिक होने कि एक ही शर्त व पहचान है सरल होना !
नास्तिक होने का मतलब आस्तिकों के विपरीत जाना नहीं बल्कि खुद को सरल बनाना मात्र है , जहाँ किसी का विरोध नहीं केवल जीवन है , उमंग है , शांति है , किसी भी मान्यता को ले कर झगड़ा या दंभ नहीं है !
अगर भगवान को मानने की आदत या मजबूरी है तो प्रकृति को भगवान बनाओ जो हमें हवा पानी रौशनी जीवन देती है ! खुद को भगवान बनाओ और मृत हो रही प्रकृति को जीवन प्रदान करो !