हमारा जन्म आखिर क्यूँ हुआ है ? इस प्रश्न की गुत्थी को सुलझाते -सुलझाते सभी विचारक , सभी संत , सभी समाजसेवी दुनिया से चले गये ! हाँ , जाते - जाते अपनी- अपनी व्याख्याये छोड़ गये ! हर एक को मानव- जन्म का मकसद अलग - अलग लगा !
मैं बड़ा अचम्भित हूँ कि इतना आसान सा प्रश्न कि हमारा जन्म आखिर क्यूँ हुआ है को हमारे विद्वजनों ने इतना उलझा दिया है कि हम भ्रमित हो गये हैं ! हर एक विचारक की कसौटी दूसरे से भिन्न है ! इसलिये पूरी मानव जाति उम्र के आखरी पड़ाव में बेहद निराश व कुंठित हो जाती है , सभी को ऐसा लगता है कि जीवन का मकसद पूरा नहीं हुआ और शरीर साथ नहीं दे रहा है , क्या मैं जीवन में असफल रहा ?
हम मानव- जाति वस्तुत : जीवन के किसी भी क्षेत्र में अपने सफल होने को अपना लक्ष्य मान कर जीवन जीते हैं फिर असफल होने पर कुंठित हो जाते हैं और सफल होने पर भी ऐसा लगता है कि कुछ और भी तो मैं कर सकता था ! अत : सफलता और असफलता ही हमारे जीने का मापदंड बन जाता है !
आइये मैं आपको बताता हूँ कि हमारा जन्म आखिर क्यूँ हुआ ?
हमारा जन्म इस धरती पर मात्र खुद को खुश रखते हुये सबों के साथ केवल ख़ुशी से समय व्यतीत करने के लिये हुआ है ! ईश्वर का मानव - जाति को जन्म देने के पीछे इसके अलावा और कोई प्रयोजन नहीं है !अपनी-अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिये अपनी-अपनी भाषायें विकसित करने की क्षमता और परिवार नामक संस्था बनाने की कला दे कर ईश्वर ने हमें खुद को खुश रखने का रास्ता भी दिखाया ! हम सब ईश्वर के इस संदेश को समझ नहीं पाने के कारण पूरा जीवन दुखों में व्यतीत करते हैं !
हमसे बेहतर पशु व् पंक्षी ही ईश्वर के सन्देश से को समझ पाये हैं , जिन्होंने ना तो कोई धर्म बनाया ना सुखों के नकली साधन बनाये , आडम्बरों से दूर पशु- पंक्षी बिना ताम-झाम के , बिना प्रकृति से छेड़ - छाड़ किये दुनियाँ में आते और जाते हैं यही जीवन -शैली ही ईश्वर का सन्देश है !