हम मज़हब से दूर क्यों नहीं जा सकते ? जब तक धर्म मज़हब के नशे से हम खुद को मुक्त न कर लें तब तक न हम खुद शांति से रह पायेंगे न दुनियां को शांति से रहने देंगे !
उस अलौकिक शक्ति ने कोई धर्म नहीं बनाया ! उसने बनाये इंसान और जानवर, उसने बनाये नर और मादा , उसने बनाई खूबसूरत सी प्रकृति हम नर मादा इंसान जानवरों पंक्षियों के लिये ! हम इंसानों ने धरती पर लकीरें खींच कर देश बनाये , दिलों पर लकीरें खींच कर धर्म बनाये फिर अपने अपने देश अपने अपने धर्म की श्रेष्ठता मनवाने के लिये हमेशा मार काट करते रहें हैं , सिलसिला आज तक जारी है ! अगर हम गीता बाईबल कुरान ईश्वर अल्लाह सब को परे कर केवल प्रकृति की पूजा करें प्रकृति को सम्मान दें संरक्षित रखें तो सारे झगड़े व आडम्बर ही खत्म हो जायेंगे !
उस अलौकिक शक्ति ने कोई धर्म नहीं बनाया ! उसने बनाये इंसान और जानवर, उसने बनाये नर और मादा , उसने बनाई खूबसूरत सी प्रकृति हम नर मादा इंसान जानवरों पंक्षियों के लिये ! हम इंसानों ने धरती पर लकीरें खींच कर देश बनाये , दिलों पर लकीरें खींच कर धर्म बनाये फिर अपने अपने देश अपने अपने धर्म की श्रेष्ठता मनवाने के लिये हमेशा मार काट करते रहें हैं , सिलसिला आज तक जारी है ! अगर हम गीता बाईबल कुरान ईश्वर अल्लाह सब को परे कर केवल प्रकृति की पूजा करें प्रकृति को सम्मान दें संरक्षित रखें तो सारे झगड़े व आडम्बर ही खत्म हो जायेंगे !
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